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Friday, October 4, 2019

खिलौना

कुछ साल पहले की बात है जब मेरी मेरे हस्बैंड से नई नई बात होनी शुरू हुई थी तब उन्होंने मुझे अपनी एक दोस्त की एक बात बताई किउसका एक छोटा सा टेडी बेयर है, जो उसकी दोस्त के साथ बचपन से है।और मुझको सबसे ज़्यादा हैरानी तब हुई जब मैंने अपने हस्बैंड की दोस्त की शादी के सब सेलिब्रेशन में वो टेडी बेयर हर एक इवेंट में उसके साथ पाया । वो लड़की होन्ग कोंग चीनी है तो मैंने सोचा शायद उनकी संस्कृति में ऐसा साधरतन होता होगा । ऐसे ही एक जापानी लड़की से मुलाकात के दौरान पता चला कि जापानी लड़के गुड़िया के साथ समय व्यतीत करना पसंद करते हैं , हैरानी भी हुई और अजीब भी, लगा पर बात आई गई हो गई ।
कुछ दिन पहले मेरा अमेरिका आना हुआ और मेरी एक भारतीय स्टूडेंट से मुलाकात हुई और  बातचीत के दौरान उसने भी बताया कि उसका भी एक टेडी है जो पिछले ३३ सालों से उसके साथ है। वो दिल्ली के उच्च माध्यमिक परिवार का लड़का है, सोचा ऐसा होता होगा ऐसे उच्च माध्यमिक परिवारों में, मैंने इस वाक्य को भी इतनी खंभीरता से नहीं लिया। ये सब घटनाएं कोई सिर्फ कुछ एक्की दुक्की बातें नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या की तरफ इशारा करती हैं ।
परन्तु कुछ दिन पहले मैंने एक लेख देखा अख़बार में कि कैसे बचपन के कुछ खास खिलोने जैसे की टेडी बेयर वयस्क लोगों को भी कठिन परिस्तिथि से झूझने का सयम और आराम देतें हैं। मैंने कभी इस विषय को इतनी गंभीरता से नहीं लिया। आज कल शारीरिक रोगों के साथ-साथ मानसिक रोगों की संख्या भी उतनी ही ज़्यादा है। और मानसिक रोग अब मात्र एक  छुपी का विषय नहीं रह गए, बल्कि एक गंभीर सच्चाई के रूप में हमारे सामने उभर के आ रहे हैं । हाल ही में मैंने गूगल डूडल में डॉ हर्बर्ट क्लेबर के बारें में पढ़ा कि कैसे उन्होनें अपने संशोधन के दौरान पाया कि मानसिक समस्या जैसे एडिक्शन सिर्फ मनोबल या चरित्र  की कमी को ही नहीं दर्शाती बल्कि एक गंभीर समस्या है और इसका इलाज भी उतनी ही गंभीरता से किया जाना चाहिए। मानसिक अवसाद या अकेलापन आज के दिन एक बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है, खासकर शहरी अकेलापन जहां गहरे संवाद की कोई जगह ही नहीं है। हम सब को इन विषयों के बारें में सोचने और अपने-अपने स्तर पर कदम उठाने की भी आवश्यकता है। परिवार छोटे हो रहे हैं जबकि हम सब को सामाजिक संपर्क की ज़रूरत है। हम लोगों में एक दूसरे पर विश्वास कम हो गया है वहीँ उमीदें सब की सब से बढ़ गयी हैं, सम्पर्क सिर्फ नाम  मात्र का रह गया है।
दवाइयें हर समस्या का समाधान नहीं हैं , हमें फिर से लोगों पर विश्वास करना सीखना होगा। रिश्तों को फिर से आहिस्ता-आहिस्ता संजोना होगा । आज का समाज स्वार्थी है , पर आज हमें हमारे भविष्य को सँभालने के लिए, एक सामाजिक दृष्टिकोण को अपनाना ही होगा। हर समय सिर्फ अपना-अपना सोचना हमें एक अकेले अंधकार की तरफ धकेल रहा है जिसका हमें थोड़ा-थोड़ा आभास तो है पर विश्वास नहीं । हमारे एकाकी परिवारों में बच्चों को छोड़िये बड़ों को भी बात करने के लिए लोग नहीं मिल रहे तभी उनका खिलोने से एक अलग संपर्क बन रहा है और वो अपनी मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। आजकल के हमारे संवाद सिर्फ शब्दों तक सीमित रह गए हैं , उनमें कोई गहराई या गंभीरता नहीं है, कारण कहीं पैसों का आभाव तो कहीं समय का । कारण गिनवाने बैठो तो अनेक हैं , पर समस्या का समाधान भी हमें ही ढूंढना  होगा ! बच्चों, बजुर्गों में मानसिक अवसाद एक गंभीरता का विषय है, पर परिवारों को एक साथ आना होगा और एक दूसरों की भावनात्मक ज़रूरतों का स्थिर स्तम्भ बनना होगा। रिश्ता खून का हो या दिल का मजबूत होना चाहिए उसमें अविश्वास या चतुराई का जहर नहीं होना चाहिए ।रिश्ता इतना मजबूत हो जो दूरियों और समय की परीक्षा में अटूट हो, सिर्फ फेसबुक या सोशल मीडिया की एक तस्वीर तक सिमित ना हो ।खिलौनों को खिलौनों की जगह रहने दो मुझे मेरे रिश्तों की तरफ लौटने दो । 

Thursday, September 26, 2019

My hobby, my choice #NoRegrets

Life always has challenges. And I laugh sometimes that when there is no challenge in life, then life itself becomes a challenge. Though my challenge is not that big, it is just that I am well-educated, married, non-working and have a passion for reading good literature and watching thought-provoking art or offbeat movies. Reading good thought-provoking books or watching movies is not an easy and comfortable affair, you need to invest a lot of your time and attention. And it could make you restless as well, sometimes for a day or two. But, this leisure activity has always been food for my soul and mind. This is what makes me feel alive and also leaves me with regrets. Because reading a good book or novel is like an addiction until you complete reading it you can not sit peacefully. So many times I could not focus on important matters when I was in the middle of reading an interesting book. And sometimes, I have been made feel what is the use of reading the fiction or someone's imagination, it is just a total waste of time and it will not give you money at the end of the day. I often tried to justify for my own sake that reading good books is not just a waste of valuable time and often argued with others as well in the anticipation of winning my own arguments. However, recently I watched Vishal Bhardwaj's trilogy on  Shakespeare's three world-famous classic plays adaptation in Hindi movies: Othello(Omkara), Macbeth(Maqbool), Hamlet(Haider). And I simply was in awe with the director and his interpretation of classic plays of Shakespeare into a modern context. It made me reflect that literature can never be old and obsolete. Literature has always been a shadow of the past and a window of the future, how could it be a mere waste of time...
We live in a society which always keeps judging us. I am also the part of this society and do the same with others, after all, I am also human and could fall to my temptations despite being so knowledgeable. So, my point is that we have brackets for everything. When you are working and could afford to read a book, not only monetarily but also the time investment, you become a role model and are aspired as a person. But if you are jobless or non-working and pursue a good hobby, it is seen as a waste of time instead of giving leisure to you, it fills you with guilt and regret and makes you realize that it might be the only reason for you being a failure(i.e. you don't earn money, do not contribute to economy, so your existence, your passion does not matter). When I was a child, I was told to focus on school academic books, it will give me admission into a better future, don't waste time on books or movies. When I started my career, I hardly had any energy or time to read a book. Now, I am non-working, and I want to spend my time creatively, I am told to do pursue something which adds value to my education and future and worth doing. Pursue a passion with a money-earning work. But I am convinced now that my hobby is my choice, it makes me a person of depth and fills my life with color and I don't need anybody's approval for this. If your gossip could be office politics or family politics, why I could not see the world from the eyes of Shakespeare or Rabindranath Tagore. Literature has not originated simply from the seed of someone's imagination, it has been the mirror of our contemporary society and thrives only because of some good readers like me who challenge the society to pursue this ambition. Though this is the irony of our society that a good reader and a good listener or good audience is not highly celebrated yet. Maybe one day we would be able to see a category for the 'Best Audience Award' in a most sought after gala functions with glamorous stage, at that time my passion will not be seen as only time pass rather an intellectual trait. Till then in the hopes of the positive paradigm shift in peoples thinking, I keep quenching my thirst for good books and movies with  #NoRegrets

Tuesday, September 24, 2019

Ambition is very costly

Recently I watched the Macbeth and Othello, two world-renowned plays by William Shakespeare. And literature is a window of our history and a glimpse of our present. Both of these plays are based on Political Ambition. Life is not black and white, it has many gray shades. And nothing comes free in this society.

Ambition looks lucrative once achieved, but it has its cost associated with it, which usually never comes in the highlight and creates the illusion. So being ambitious is good, but we should be realistic too. 

Wednesday, September 18, 2019

दुर्गा पूजा: अपनों की घरवापसी का उत्सव

साल के इस वक़्त  घर की बहुत याद आती है।  पतझड़ बोलो या शरद ऋतु का प्रारंम्भ, पत्तें रंग बदल रहे हैं, हवा में एक अजीब सी ठण्डक महसूस होती है। दिन छोटे होने लगे हैं, शाम होते-होते ही अँधेरा छाने लगता है, कदमों की चाल जानो बढ़ जाती है घर की ओर जल्दी से पहुंचने को। इंडिया बोलो या अमेरिका, सब जगह साल का ये वक़्त त्योहारों का होता है, कहीं दुर्गा पूजा और दिवाली  की धूम है,  तो कहीं क्रिसमस की लाइटिंग। दिवाली हमेशा से ही इंडिया का सबसे प्रसिद्ध त्यौहार रहा है, इस की ख़ूबसूरती देखते ही बनती है।
शादी मेरी एक बंगाली परिवार में होने के बाद से, दिवाली का आगमन मानो १ महीना पहले से ही हो जाता है, यानि दुर्गा पूजा से। दिल्ली में रहते हुए सुना तो बहुत था दुर्गा पूजा के बारे में, कभी-कभी पास की बंगाली कम्युनिटी में जाकर सेलिब्रेशन देखा भी था, पर कभी दिल के इतने करीब नहीं था। शादी के बाद पहली दुर्गा पूजा पर, मैं इंडिया में नहीं थी। देखा पतिदेव का मन बहुत उदास था, मैं भी जिंदिगी में पहली बार घर से इतनी दूर गई  थी, अभी परदेसी होना का भाव मन पर पूरी तरह हावी नहीं हुआ था, तो पतिकी भावनाओं को दिल से समझ नहीं पा रही थी। वक़्त गुज़रता गया और ये सिलसिला हर साल चलता रहा, दिल्ली की पड़ोस की दुर्गा पूजा, विदेश के एक छोटे से कम्युनिटी हॉल की दुर्गा पूजा में तब्दील हो गई , जगह बदल गई पर जज़्बातों में अम्मुमन कोई ज़्यादा फर्क नहीं आया था। फिर एकबार मैं और मेरे मिस्टर को दुर्गा पूजा के समय  इंडिया जाने का मौका मिला, मेरे पति का उल्लास देखते ही बनता  था, मैंने उनको इससे ज़्यादा खुश और उत्साहित  कभी नहीं देखा था । मैं भी बहुत खुश थी, आफ्टरऑल ये मेरी कायदे से जग-विख्यात कलकत्ता की पहली दुर्गा पूजा थी। दुर्गा पूजा कहने को तो 4-दिन का सेलिब्रेशन होता है, पर इसका उत्साह साल भर देखने को मिलता है।दुर्गा पूजा से महीनों पहले पण्डाल बनने शुरू हो जाते हैं । गिफ्ट्स और  शॉपिंग का सिलसिला महीनों पहले से ही शुरू हो जाता है। घरों की विशेष सफाई शुरू हो जाती है,  परदे धोना, पंखें, कूलर, पानी की टंकी, घर के जांगले, एकदम डीप क्लीनिंग के एपिसोड्स चलते हैं। दुर्गा पूजा के दिन जैसे-जैसे पास आने लगते हैं, बाज़ारों की रौनक बढ़ने लगती है। घरों पर रंग-बिरंगी लड़ियां झूलने लगती हैं। शुइली फूलों की सुगंध से सारा समाह महकने लगता है, कांशफूल भी मैदानों में झूलते नज़र आने लगते हैं। हर बंगाली अड्डे  की चर्चा का टॉपिक होता है कि इसबार दुर्गा ठाकुर किस वाहन से आएंगी, नौका, हाथी और घोड़ा। किसने कितनी और क्या-क्या शॉपिंग की, सब डिसकस होता है। किस पूजा समिति के क्लब की पूजा की थीम क्या है, इसबार कौन-कौन से पण्डाल विजिट किया जाएगा सब प्लानिंग की जाती है। किसदिन फॅमिली गेटटुगेदर और किसदिन फ्रेंड्स का अड्डा होगा, सब कुछ पहले से तय होता है। अखबार में दुर्गा पूजा की शॉपिंग के स्पेशल विज्ञापन छपने लगते हैं. माँ दुर्गा, शिवजी, गणेश , कार्तिकेय , लक्ष्मी और सरस्वती को लेकर हंसी मज़ाक होते हैं, ऐसा सिर्फ भारत में ही संभव है जहां भगवान को भी परिवार का दर्जा और सम्मान दिया जाता है।
फिर आता है महालया का दिन, औपचारिक  रूप से दुर्गा पूजा का आगमन। सब लोग सुबह-सुबह नहा धो कर महालया सुनने के लिए आतुर नज़र आते है, पहले महालया रेडियो पर सुना जाता था, फिर टीवी आ गया और आजकल तो सब लैपटॉप पर होता है। आखरी मुहूर्त तक दुर्गा  पूजा की तैयारी  को  फाइनल टच दिया जाता है। फिर आता है षष्ठी का दिन और उसदिन कोला बहू को गंगा घाट से स्नान कराके गणेश जी के साथ स्थापित किया जाता है और दुर्गा ठाकुर का घर में आगमन होता है। सुबह-सुबह नहा धोकर घर की ग्रेहणियां  सब कमरों की चौखट पर अल्पना देती हैं। परिवार के सबलोग मंदिर में पुष्पांजलि देने जातें हैं। षष्ठी के दिन माओं का व्रत होता है, निरामिष खाना बनता है। इसी दिन चोखुदान होता है यानि माँ दुर्गा की प्रीतिमा पर आंखें आंक कर उन्हें पूजा के लिए पूर्ण किया जाता है। और इसी दिन से सब पण्डाल दर्शन के लिए खोल दिए जातें हैं। फिर अष्टमी के दिन फिरसे  निरामिष खाना और मंदिर में सब पुष्पांजलि देने जाते हैं और शाम को मंगल आरती होती है। नवमी के दिन मांगशो यानि मटन बनता है, अष्टमी रात १२ बजे से ही मटन की दुकान के सामने लाइन लगाने से ही काम बनता है, नहीं तो चिकन से ही काम चलाना पड़ता है। दुर्गा पूजा के दौरान दोस्तों  रिश्तेदारों का तो आना जाना लगा ही रहता है। फिर आता है दशमी का दिन। ये बहुत ही मिश्रित भावनओं का दिन होता है, इस दिन कायदे से पूजा का अंतिम दिन होता है और इसी के साथ दुर्गा ठाकुर के जाने का वक़्त। सब सुहागनें दुर्गा ठाकुर को सिन्दूर लगा कर और मिष्ठी खिला कर, भीगी आंखों  से विदाई देती हैं इस वायदे के साथ कि अगले साल दुर्गा ठाकुर फिरसे अपने चारों बच्चों यानि लक्ष्मी , सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ आएंगी.
दुर्गा पूजा सिर्फ माँ दुर्गा का आगमन नहीं है, इस उत्सव को मनाने, देश दुनिया से परिवार के सबलोग अपने-अपने घर जाने की कोशिश करते हैं और जो नहीं जा पाते, वो मन ही  मन परिवार को याद  करके उनके लिए   मंगलकामना करते हैं।
दुर्गा पूजा का सही मायने सिर्फ उत्साह, ख़ुशी नहीं, बल्कि परिवार, मित्रों और अपनों के साथ ख़ुशी सांझी करना है। शायद मैं अपने देश, अपने परिवार से इतनी दूर नहीं होती तो इसके सही मायनें कभी समझ ही नहीं पाती। ये सच्चे मायनों में एक घरवापसी का उत्सव है।

Tuesday, September 10, 2019

परदेसी

मैं परदेसी हूं, अपनों के साथ को रोती हूं
मेरे सब तीज-त्यौहार फीके हैं, दिवाली के दीये भी शायद भीगे हैं
मेरे मन का खालीपन कोई समझता नहीं, सब समय पैसों के तराजू पे तुलती हूं
मेरा कोई अपना नहीं, मैं परदेसी हूं

गैरों में भी तन्हा हूं, अपनों में भी बेगानी  हूं
सरहदों के दायरों में घिरी, जिम्मेदारियों के चक्रव्यूह में उलझी हूं
मेरा कोई अपना नहीं, मैं परदेसी हूं

ज़मीनी सरहदों को तो मैं लांघ आऊं, दिलों के फासलों को मैं कैसे मिटाऊं
भागी नहीं मैं अपनों से,  भागी नहीं मैं अपनों से,  न देश की समस्यों से
चाहत थी छोटी सी, दुनियां देखूं अपनी अँखियों से
बस चाहत थी छोटी सी, दुनियां देखूं अपनी अँखियों से

लौटना मैं भी चाहती थी, पर अपनों का साथ ही छोटा था
लौटना मैं भी चाहती थी, पर अपनों का साथ ही छोटा था
ज़रा-ज़रा वक़्त जीत गया, गैरों के संग ही जीवन मेरा बीत गया

अफ़सोस नहीं कोई, मन में एक कसक रह गई
कब दिलों की दूरी इस कदर बढ़ गई, यादों की नाज़ूक डोरी भी उलझ के बिखर गई ,
यादों की नाज़ूक डोरी भी उलझ के बिखर गई

हर परदेसी की ये कथा  है, हर परदेसी की ये कथा है , कटे पर जैसे परिंदों सी व्यथा है
जिसने जो चाहा, समझा है,
जिसने जो चाहा, समझा है,
दिल गवाह है, मैं गैर नहीं, तुम्हारी अपनी हूं

Wednesday, August 28, 2019

Facebook की दुनिया

Facebook की  दुनिया बहुत छोटी होती है, तेरी मेरी खुशियों का ढिंढोरा होती है ।
देखकर दूसरों की जिंदिगी में उजाले, ना जाने कितनी रातें  मुझे नींद नहीं आई ।
मालूम है ऐसी सोच संकुचित मानसिकता की निशानी होती है ॥

मैंने भी कोशिश की, दुनिया संग मुस्कराने की ।
छुपा कर सब दुःख-दर्द सीने में, खुशिओं का मुखौटा लगाकर जीने की ।
पर क्या फायदा ऐसे बेमानी मुस्कराने में, झूठी मुस्कान हमेशा फीकी होती है ।
Facebook की  दुनिया बहुत सीमित होती है, तेरी मेरी खुशियों का ढिंढोरा होती है ॥

मन के अंधेरों को कैसे रोशन करुं, ढूंढा बहुत ये चिराग मैंने, सोशल मीडिया के गलियारों में ।
मन के अंधेरों को कैसे रोशन करुं, ढूंढा बहुत ये चिराग मैंने, सोशल मीडिया के गलियारों में ।
अँधेरा सिर्फ गहराता ही गया, अँधेरा सिर्फ गहराता ही गया, जितनी चली मैं इन चौराहों में ।
इतनी सस्ती नहीं खुशियां, इतनी सस्ती नहीं खुशियां, जो मिल जाए हमें गैस के गुबारों में ॥

Facebook की  दुनिया बहुत छोटी होती है, तेरी मेरी खुशियों का ढिंढोरा होती है ॥

Monday, August 12, 2019

Important links

Common perceptions of foreigners about India

  1. Yoga
  2. Female harassment: This country is not safe for girls or females.
  3. Spicy food: Land of curry.
  4. Colorful houses and clothes.
  5. Country of festivals: Holi(festival of colors) and Diwali(festival of lights)
  6. Poverty: Slums of India, which has been proudly portrayed in the movie Slumdog Millionaire

Wednesday, April 10, 2019

My Evolving love for Nature

Traveling has played a major role in my life. I always had the curious nature, then I got married into a Bengali family, that further fueled my curiosity. My younger brother has an interest in gardening, so that was my first encounter with trees and flowers.

My journey with trees:
  1. Neem
  2. Bargad or vat or Banayan tree
  3. Banana tree
  4. Beetle nut tree
  5. Mango tree
  6. Apple tree
  7. Date palm tree
  8. Teak wood or Sagwan 
  9. Shisham
  10. Kikar tree or babool or Acacia: it is a thorny tree
  11. Bamboo tree
  12. Jute
  13. Cactus
  14. Birch
  15. Pine
  16. Fir
  17. Cane
  18. Oak
  19. cypress
  20. Pipal tree
  21. Ashoka: Sacred plant
  22. Arjun tree: Its bark is very beneficial.
  23. Sandal
  24. Cycas plant
  25. Dutch Elm
  26. Crepe Myrtle
  27. Sycomore
  28. Misletoe tree
Flower:
  1. Vinca or sadabahar in Hindi
  2. Palash ke phool: Flame of the forest
  3. Crocus
  4. Mums: These beautiful flowers bloom in fall and winter seasons.
  5. Geraniums:Colorful, small summer flower plants.

Monday, April 8, 2019

Foreign Education

How to select a foreign university when you are interested in educating yourself abroad.

  1. Language: What language you would be studying there and what language is spoken there.
  2. Course curriculum: does the university offer the course you seem to be interested in?
  3. Safe: Is it a safe country to study there.
  4. Expensive: do they have enough funds to offer financial aid through various internships and scholarships.
  5. Employability: what are the prospects of finding a job after completing the study from abroad.
  6. Can you work while studying?

My Alma Mater

It makes me really glad when I see my alma mater growing. Here, I will be highlighting some of the achievements of my alma mater.

  1. Patent 


दोस्त

फेसबुक की दुनिया बहुत असीम होती हे, तेरे मेरे सुख दुःख का पिटारा होती है
रोज़ सुबह दूकान लगती है रोज़ सुबह दुकान लगती है लाइक और कमेंट के पैमाने पर गम और खुशीआं तेरी मेरी बिकती हैं
फेसबुक की दुनिया बहुत असीम होती हे, तेरी मेरी खुशीआं का ढिंढोरा होती है

देखकर दूसरों की जिंदिगी के उजाले, न जाने कितनी रातें मैं नहीं सोई
मालूम है ये संकुचित मानसिकता की निशानी होती है

ऐसा नहीं की मैंने कोशिश नहीं की दुनिया संग मुस्कराने की, ऐसा नहीं की मैंने कोशिश नहीं की दुनिया संग मुस्कराने की, पर ऐसी मुस्कराहट बेमानी होती है

मन के अंधेरों को कैसे रोशन करुं, ढूंढा ये चिराग मैंने बहुत सोशल मीडिया के गलियारों  में
अँधियारा सिर्फ गहराता ही गया अँधियारा सिर्फ गहराता ही गया, जितना झाँका मैंने इन दरारों में
 इतनी सस्ती नहीं खुशियां इतनी सस्ती नहीं खुशियां जो मिल जाएं हमे गैस के गुबारों में

हर एक फेसबुक पोस्ट को खंगाला है ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी try मारा है
पर मिला नहीं वो सकून, जो मिला जब किसी दोस्त ने ठहाका ज़ोर से मारा है

व्यस्तता नहीं इतनी की दोस्तों ने मिलना बंद कर दिया, फेसबुक और ट्विटर पर संसार अलग बस गया
इन खोखले जस्बातों से मन और नहीं मानता, इन बेहिसाब बेमतलब की बातों से दिल और नहीं टहलता 

Wednesday, April 3, 2019

All for the love of tea

Tea is the first thing that comes to my mind when I wake up in the morning.
Different types of tea

  1. White tea: Most unprocessed tea; unoxidized
  2. Green tea: unoxidized; pan dried or steamed to stop any kind of oxidation in future
  3. Yellow tea: in between white and green tea
  4. Matcha tea: powdered green tea
  5. ooolang tea: oxidized between green tea to black tea;
  6. Black or red tea: 90-95% oxidized
  7. herbal tea: Like chamolie flower tea
  8. Flavored tea: Jasmine tea
  9. Post-fermented tea: raw(naturally fermented for 20-25 years) or cooked(artificially fermented in 2-months);